संतों के बीच विवाद: राम भद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को सीधी चुनौती क्यों दी?
संतों के बीच विवाद: राम भद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को सीधी चुनौती क्यों दी? संतों के बीच विवाद: राम भद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को दी चुनौती—क्यों और कैसे? 1. परिचय और संदर्भ इस लेख में हम दो प्रमुख आधुनिक धर्मगुरुओं के बीच एक सार्वजनिक राजनीति-नुमा विवाद का सर्वांगीण विश्लेषण करेंगे: राम भद्राचार्य और प्रेमानंद महाराज — जिसमें राम भद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को संस्कृत भाषा में चुनौती दी, वहीं प्रेमानंद महाराज के बयानों ने महिलाओं और युवा-पीढ़ी के चरित्र पर टिप्पणी करते हुए व्यापक विवाद खड़ा कर दिया। 2. राम भद्राचार्य की चुनौती—क्या कहा और क्यों? तुलसी पीठ के संस्थापक राम भद्राचार्य ने सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में प्रेमानंद महाराज को गंभीर चुनौती दी— “मेरे सामने एक अक्षर संस्कृत बोलकर दिखा दें,” या “मेरे संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में समझा दें”—इस पर मिशाल उनके ज्ञान की परीक्षा थी। यह चुनौती केवल भाषा-ज्ञान को परखने का प्रयास नहीं था, बल्कि ...